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Dev Bhumi - Kailas Manas Sarovar (देव भूमी - कैलास मानस सरोवर)
Dev Bhumi - Kailas Manas Sarovar (देव भूमी - कैलास मानस सरोवर)
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Author: Vinayak Vasantrao Tembhurne
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Publisher: Vaishali Prakashan
Pages: 110
Edition: Latest
Binding: Paperback
Language:Marath
Translator:
देव भूमी - "कैलास मानस सरोवर"
०९ ऑगस्ट १९६१ रोजी मलकापूर, (जिल्हा- बुलढाणा) महाराष्ट्र येथे जन्म आणि तेथेच शिक्षण पूर्ण केले. शालेय व महाविद्यालयीन जीवनात वक्तृत्व, वादविवाद, निबंध आदि स्पर्धांमध्ये उत्साहाने सहभाग घेऊन अनेक पारितोषिके मिळविली. शिक्षण पूर्ण केल्यावर मुंबई येथे सुरवातीला बँक ऑफ इंडिया आणि नंतर युनियन बँक ऑफ इंडिया येथे अधिकारी म्हणून एकंदर ३९ वर्षे देशाच्या विविध प्रदेशात बँकिंग सेवा देऊन सन २०२१ मध्ये युनियन बँकेतून महाप्रबंधक पदावरुन सेवा निवृत्त. त्यानंतर नाशिक येथे कायमस्वरुपी वास्तव्यास. समाज सेवेची आवड असल्याने नोकरीत असतांना विविध संस्थाना मदत, निवृत्तीनंतर विवेकानंद केंद्र, शिवयोग आश्रम यांच्याशी संलग्न. दरम्यान जानेवारी २०२२ विविध तीर्थयात्रा तसेच दररोज संत ज्ञानेश्वर, समर्थ रामदास स्वामी, जगदगुरु श्री तुकाराम महाराज यांच्या अभंगाचे व्हॉट्स अॅप सारख्या डिजिटल माध्यमातून दैनंदिन निरुपण अविरत पणे सुरु आहे.
लेखक. विनायक वसंतराव टेंभुर्णे
प्रकाशक. वैशाली प्रकाशन

कैलाश मानसरोवर केवल एक भौगोलिक यात्रा नहीं बल्कि एक आंतरिक बुलावा है।
मेरे मित्र श्री विनायक वसंतराव टेंभूर्णे ने सपरिवार इस दुर्गम यात्रा को पूरा कर काठमांडू से मानसरोवर तक के अपने अनुभवों को पुस्तक रूप में सहेजा है।
मैंने मराठी साहित्य में इस प्रकार की व्यावहारिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से उपयोगी पुस्तकों का अभाव हमेशा महसूस किया है।
यह पुस्तक निश्चय ही भविष्य के मराठी यात्रियों के लिए एक सच्चा मार्गदर्शक बनेगी।
कैलाश पर्वत की भावविभोर कर देने वाली फोटो एवं अन्य पर्यटक स्थलों एवं तीर्थस्थलों की फोटुओं ने पुस्तक को बहुमूल्य बना दिया है।
कहाँ रुकें, क्या तैयारी करें, और मन को कैसे तैयार करें।
ऐसे पवित्र प्रयास के लिए लेखक को हृदय से बधाई और शुभकामनाएँ।
हम दोनों ने लगभग एकसाथ ही बैंक ज्वाइन किया था। शुरू से ही विनायक जी एक निर्भीक और साहसी व्यक्तित्व के स्वामी रहे और सेवानिवृत्त के बाद भी उनमें वही उत्साह परिलक्षित होता है। उन्होंने इस दुर्गम यात्रा को अत्यंत सहज बना दिया।
शिवकृपा उनपर और उनके परिवार पर सदा बरसती रहे!
ॐ नमः शिवाय!
हरीश कुमार शर्मा
मुख्य प्रबंधक (सेवानिवृत्त)
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
कैलाश मानसरोवर केवल एक भौगोलिक यात्रा नहीं बल्कि एक आंतरिक बुलावा है।
मेरे मित्र श्री विनायक वसंतराव टेंभूर्णे ने सपरिवार इस दुर्गम यात्रा को पूरा कर काठमांडू से मानसरोवर तक के अपने अनुभवों को पुस्तक रूप में सहेजा है।
मैंने मराठी साहित्य में इस प्रकार की व्यावहारिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से उपयोगी पुस्तकों का अभाव हमेशा महसूस किया है।
यह पुस्तक निश्चय ही भविष्य के मराठी यात्रियों के लिए एक सच्चा मार्गदर्शक बनेगी।
कैलाश पर्वत की भावविभोर कर देने वाली फोटो एवं अन्य पर्यटक स्थलों एवं तीर्थस्थलों की फोटुओं ने पुस्तक को बहुमूल्य बना दिया है।
कहाँ रुकें, क्या तैयारी करें, और मन को कैसे तैयार करें।
ऐसे पवित्र प्रयास के लिए लेखक को हृदय से बधाई और शुभकामनाएँ।
हम दोनों ने लगभग एकसाथ ही बैंक ज्वाइन किया था। शुरू से ही विनायक जी एक निर्भीक और साहसी व्यक्तित्व के स्वामी रहे और सेवानिवृत्त के बाद भी उनमें वही उत्साह परिलक्षित होता है। उन्होंने इस दुर्गम यात्रा को अत्यंत सहज बना दिया।
शिवकृपा उनपर और उनके परिवार पर सदा बरसती रहे!
ॐ नमः शिवाय!
हरीश कुमार शर्मा
मुख्य प्रबंधक (सेवानिवृत्त)
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
मला प्रेमाने पाठवलेलं पुस्तक पाहताच पुस्तकाच्या प्रेमातच पडलो कारण त्यात मजकुरासह छान फोटो होते. प्रथमतः चाळताच मला पुस्तक वाचण्याची फारच उत्सुकता लागली. त्यामुळे मी लगेचच वाचायला सुरुवात केली. पुस्तक एकाच बैठीकात वाचावे इतके छान आहे. अर्थात् मी ते ३ बैठकित वाचले. वाचता वाचता इतकी उत्सुकता वाटत गेली की पुढे काय अनुभव आहेत ते लगेचच वाचावे असे वाटत गेले. त्या मुळे लगेचच वाचून काढले. मात्र हे खरे आहे की लेखकाने फारच उत्खंठावर्धक लिहिले आहे. पुस्तक वाचल्यावर कैलास मानससरोवर स्वतःच परिक्रमा करून आल्यासारखे वाटते. पुस्तक संग्रही ठेऊन दुसऱ्या लोकांना मार्गदर्शक ठरेल असे आहे.
लेखकाचे लिखाण अभिनंदनास नक्कीच पात्र आफे व मी लेखकाचे अभिनंदन करतो. जास्तीत जास्त लोकांनी वाचून या अनुभवांचा लाभ घ्यावा व आपली परिक्रमा शिस्तीत व आनंदाने पुरी करावी.
लेखक ने अपने वास्तविक अनुभव को लिपिबद्ध किया है और बहुत खूबसूरती से प्रस्तुत किया है। मैं एक ग़ैर मराठी भाषी हूँ किंतु मराठी का पूर्ण ज्ञान ना होने के बावजूद देवनागरी लिपि होने के कारण मुझे समझने में काफ़ी आसानी हुई। मैं संस्तुति करता हूँ कि सभी बंधु जो कैलाश गए नहीं हैं किंतु कैलाश के बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं वो ये पुस्तक अवश्य पढ़ें। धन्यवाद। केशव बैजल
"कैलास मान सरोवर" एका sitting मध्ये वाचलं. बराच काळानंतर संपूर्ण पुस्तक एका sitting मध्ये वाचलं. कारण यात्रेची तयारी अती बारकाईने उल्लेख केले.
यात्रे पुर्व शारीरिक तयारी ची वर्णन उत्तम व योग्य.
अक्षर, page set-up, फोटो easy to read by non Marathi person.
वाचत असताना प्रत्यक्ष परिक्रमा आपली काळजी घेणारी ओळखीची माणसानं सोबत करत आहे असे अनुभव आला. बसून वाचन करण्या ठिकाणी शिवमय अनुभवला.
मला पण कैलास मानसरोवर यात्रा करण्यास इच्छा झाली आहे.
वी बालाजी राव,
उप महा प्रबंधक (सेवा निवृत्त),
सेंट्रल बँक ऑफ इंडिया,
मुक्काम : पनवेल