Anjuribhar Aakash (अंजुरीभर आकाश)

Chandrashekhar Gokhale
Ashok Bindal
9789384547141
Divya Prakashan
अनुवाद
ये किताब दो धारी तलवार हो गई हैं | एक धार पे मराठी चमक रही है - दुसरी पर हिन्दी !

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ये किताब दो धारी तलवार हो गई हैं | एक धार पे मराठी चमक रही है - दुसरी पर हिन्दी ! एक धार पर चंद्रशेखर गोखले चल रहे हैं - दुसरी पर अशोक बिंदल ! दोनों बड़े संजीदा लगते हैं| सीरयस हैं | एक काटता है दुसरा उप पर नमक छिड़क देता है | ये कवितायें पढ़ते हुये बहुत से मुहावरे याद आये | जैसे तलवार तर्बूज पे गिरे या तर्बूज तलवार पे... कटने वाला तो वही है.... तर्बूज ! ...यानी पढ़ने वाला... शायरी का रसिक !
  • AuthorChandrashekhar Gokhale
  • TranslatorAshok Bindal
  • Edition1st/2016
  • Pages129
  • Weight (in Kg)0.31
  • LanguageHindi
  • BindingHard Bound

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Anjuribhar Aakash (अंजुरीभर आकाश)

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ये किताब दो धारी तलवार हो गई हैं | एक धार पे मराठी चमक रही है - दुसरी पर हिन्दी !

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